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Shani Gayatri Tamil Lyrics

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Shani Gayatri Tamil Lyrics. The Gayatri mantra of Lord Shani needs to be chanted on Saturdays to get rid of the ill effects of Saturn planet. For those having Kantaka Shani, Ezhara Shani or Sade Sati or Janma Shani must chant Shani Gayatri on a daily basis.

Shani Gayatri in Tamil

ஓம் சனைச்சராய வித்மஹே
சூர்ய புத்ராய தீமஹி
தன்னோ மந்த ப்ரசோதயாத்

Om Shanaischaraya Vidmahe
Suryaputraya Dheemahi
Tanno Mandah PrachodayAt

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January 2, 2016 |

Shani Gayatri Mantra Malayalam Lyrics

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Shani Gayatri Mantra Malayalam Lyrics ശനി ഗായത്രി മന്ത്രം is the prayer of Lord Shani Dev. Below is the lyrics of Shanidev Gayatri in Malayalam.

ഓം ശനൈശ്ച്ചരായ വിദ്മഹേ
ഛായാപുത്രായ ധീമഹീ
തന്നോ മംദ: പ്രചോദയാത്

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May 3, 2014 |

Aarti Shani Dev Ki Lyrics

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Shri Shani Dev ki Aarti Lyrics. Jay Jay Shri Shanidev Bhaktan Hitakaari is the popular devotional song of Lord Shani. Worshipping Navagraha Shani on Saturdays is very beneficial to get rid of Shani Dosha and Sade Shani.

Aarti Shani Dev Ki Lyrics

Jay Jay Shri Shanidev Bhaktan Hitakaari,
Sooraj Ke Putra Prabhu Chaaya Mahataari .
Jay Jay Shri Shanidev Bhaktan Hitakaari.

Shyaam Ank Vakra Drasht Chaturbhujaa Dhaari,
Nilaambar Dhaar Naath Gaj Ki Asavaari .
Jay Jay Shri Shanidev Bhaktan Hitakaari.

Kirit Mukut Shish Sahaj Dipat Hai Lilaari,
Muktan Ki Maal Gale Shobhit Balihaari.
Jay Jay Shri Shanidev Bhaktan Hitakaari.

Modak Mishtaan Paan Chadhat Hai Supaari,
Lohaa Til Tel Udad Mahishi Ati Pyaari.
Jay Jay Shri Shanidev Bhaktan Hitakaari.

Dev Danuj Rishi Muni Surat Nar Naari,
Vishvanaath Dharat Dhyaan Sharan Hai Tumhaari.
Jay Jay Shri Shanidev Bhaktan Hitakaari.

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March 29, 2014 |

Shani Chalisa Hindi Lyrics

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Shani Chalisa Hindi Lyrics शनि चालीसा is the devotional prayer addressed to Lord Shanidev. Below is the lyrics of Shaneshwara Chalisa in हिन्दी.

श्री शनि चालीसा

॥ दोहा ॥

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल ।
दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ॥
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज ।
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज ॥

जयति जयति शनिदेव दयाला । करत सदा भक्तन प्रतिपाला ॥
चारि भुजा, तनु श्याम विराजै । माथे रतन मुकुट छवि छाजै ॥
परम विशाल मनोहर भाला । टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला ॥
कुण्डल श्रवण चमाचम चमके । हिये माल मुक्तन मणि दमके ॥
कर में गदा त्रिशूल कुठारा । पल बिच करैं आरिहिं संहारा ॥
पिंगल, कृष्णों, छाया, नन्दन । यम, कोणस्थ, रौद्र, दुख भंजन ॥
सौरी, मन्द, शनि, दश नामा । भानु पुत्र पूजहिं सब कामा ॥
जा पर प्रभु प्रसन्न है जाहीं । रंकहुं राव करैंक्षण माहीं ॥
पर्वतहू तृण होई निहारत । तृण हू को पर्वत करि डारत ॥
राज मिलत बन रामहिं दीन्हो । कैकेइहुं की मति हरि लीन्हों ॥
बनहूं में मृग कपट दिखाई । मातु जानकी गई चतुराई ॥
लखनहिं शक्ति विकल करि डारा । मचिगा दल में हाहाकारा ॥
रावण की गति-मति बौराई । रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई ॥
दियो कीट करि कंचन लंका । बजि बजरंग बीर की डंका ॥
नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा । चित्र मयूर निगलि गै हारा ॥
हार नौलाखा लाग्यो चोरी । हाथ पैर डरवायो तोरी ॥
भारी दशा निकृष्ट दिखायो । तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो ॥
विनय राग दीपक महं कीन्हों । तब प्रसन्न प्रभु है सुख दीन्हों ॥
हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी । आपहुं भरे डोम घर पानी ॥
तैसे नल परदशा सिरानी । भूंजी-मीन कूद गई पानी ॥
श्री शंकरहि गहयो जब जाई । पार्वती को सती कराई ॥
तनिक विलोकत ही करि रीसा । नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा ॥
पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी । बची द्रौपदी होति उघारी ॥
कौरव के भी गति मति मारयो । युद्घ महाभारत करि डारयो ॥
रवि कहं मुख महं धरि तत्काला । लेकर कूदि परयो पाताला ॥
शेष देव-लखि विनती लाई । रवि को मुख ते दियो छुड़ई ॥
वाहन प्रभु के सात सुजाना । जग दिग्ज गर्दभ मृग स्वाना ॥
जम्बुक सिंह आदि नखधारी । सो फल जज्योतिष कहत पुकारी ॥
गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं । हय ते सुख सम्पत्ति उपजावैं ॥
गर्दभ हानि करै बहु काजा । गर्दभ सिद्घ कर राज समाजा ॥
जम्बुक बुद्घि नष्ट कर डारै । मृग दे कष्ट प्रण संहारै ॥
जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी । चोरी आदि होय डर भारी ॥
तैसहि चारि चरण यह नामा । स्वर्ण लौह चांजी अरु तामा ॥
लौह चरण पर जब प्रभु आवैं । धन जन सम्पत्ति नष्ट करावै ॥
समता ताम्र रजत शुभकारी । स्वर्ण सर्व सुख मंगल कारी ॥
जो यह शनि चरित्र नित गावै । कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै ॥
अदभुत नाथ दिखावैं लीला । करैं शत्रु के नशि बलि ढीला ॥
जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई । विधिवत शनि ग्रह शांति कराई ॥
पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत । दीप दान दै बहु सुख पावत ॥
कहत रामसुन्दर प्रभु दासा । शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा ॥

॥ दोहा ॥

पाठ शनिश्चर देव को, की हों विमल तैयार ।
करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार ॥

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March 25, 2014 |

Shani Gayatri Mantra

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Shani Gayatri Mantra is the Gayathri mantram of Lord Shani, one of the powerful Navagraha planets in Hinduism. Praying to Shanidev by chanting Shani Gayatri Mantra will help to nullify the negative effects of Shani in horoscope.

Shani Gayatri Mantra

Om Shanaischaraya Vidmahe
Sooryaputraya Dhimahi
Tanno Manda Prachodayat

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February 1, 2014 |
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